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অর্গলা স্তোত্র

Argala Stotra

Argala Stotra

Text in देवनागरी script

Devotional text

🌐

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अर्गलास्तोत्रम्म्
अर्गलास्तोत्रम्म्
॥श्री॥ी॥
श्रीचण्डिकाध्यानम्यानम्
ॐबन्धूककुसुमाभासांधूककुसुमाभासांपञ्चमुण्डाधिवासिनीम्नीम्।
स्फुरच्चन्द्रकलारत्नमुकुटांनमुकुटांमुण्डमालिनीम्
नीम्॥
त्रिनेत्रांांरक्तवसनांतवसनांपीनोन्नतघटस्तनीम्त
नीम्।
पुस्तकंत
कंचाक्षमालांचवरंचाभयकंक्रमात्मात्॥
दधतींसंस्मरेन्नित्यमुत्तराम्नायमानिताम्ताम्।
अथवा
याचण्डीमधुकैटभादिदैत्यदलनीय
दलनीयामाहिषोन्मूलिनीनी
याधूम्रेक्षणचण्डमुण्डमथनीेक्षणचण्डमुण्डमथनीयारक्तबीजाशनीतबीजाशनी।
शक्तिःशुम्भनिशुम्भदैत्यदलनीयदलनीयासिद्धिदात्रीपरा
सादेवीनवकोटिमूर्तिसहिता
तामांपातुविश्वेश्वरीवरी॥
अथअर्गलास्तोत्रम्म्
ॐअस्ययश्रीअर्गलास्तोत्रमन्त्रस्ययविष्णुरृषिः, अनुष्टुप्टुप्छन्दःदः,
श्रीमहालक्ष्मीर्देवतावता, श्रीजगदम्बाप्रीतयेीतयेसप्तशतिपाठाङ्गत्वेनवेन
जपेविनियोगःयोगः।
ॐनमश्चण्डिकायैकायै
मार्कण्डेयण्डेयउवाच।
ॐजयत्वंवंदेवि
चामुण्डेजयभूतापहारिणि
।
जयसर्वगतेगतेदेवि
कालरात्रि
नमोऽस्तुत
ुते॥१॥
जयन्तीत
ीमङ्गलागलाकालीभद्रकालीकालीकपालिनी
नी।
दुर्गाशिवावाक्षमाधात्रीस्वाहावाहास्वधावधानमोऽस्तुत
ुते॥२॥
मधुकैटभविध्वंसि
विधातृवरदेधातृवरदेनमः।
अर्गलास्तोत्रम्म्
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥३॥
महिषासुरनिर्नाशि
भक्तानांतानांसुखदेनमः।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥४॥
धूम्रनेत्रवधेवधेदेवि
धर्मकामार्थदायिनि
।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥५॥
रक्तबीजवधेतबीजवधेदेवि
चण्डमुण्डविनाशिनि
।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥६॥
निशुम्भशुम्भनिर्नाशित्रिलोक्यशुभदेयशुभदेनमः।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥७॥
वन्दिताङ्घ्रियुगेयुगेदेवि
सर्वसौभाग्यदायिनि
।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥८॥
अचिन्त्यरूपचरितेतेसर्वशत्रुविनाशिनि।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥९॥
नतेभ्यःय
ःसर्वदादाभक्त्याचापर्णेदुरितापहेतापहे।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥१०॥
स्तुवद्भ्योभक्तिपूर्वंंत्वांवांचण्डिकेकेव्याधिनाशिनि।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥११॥
चण्डिकेकेसततंयुद्धेधेजयन्तिपापनाशिनि
।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥१२॥
देहि
सौभाग्यमारोग्यंदेहि
देवि
परंसुखम्।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥१३॥
विधेहिदेवि
कल्याणंयाणंविधेहिविपुलांपुलांश्रियम्यम्।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥१४॥
विधेहिद्विषतांषतांनाशंविधेहिबलमुच्चकैःचकैः।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥१५॥
सुरासुरशिरोरत्ननिघृष्टचरणेऽम्बिके
के।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥१६॥
अर्गलास्तोत्रम्म्
विद्यावन्तंतंयशस्वन्तंतंलक्ष्मीवन्तञ्चचमांकुरु।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥१७॥
देवि
प्रचण्डदोर्दण्डदैत्यदर्पनिषूदिनि।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥१८॥
प्रचण्डदैत्यदर्पघ्नेनेचण्डिकेकेप्रणतायणतायमे।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥१९॥
चतुर्भुजेजेचतुर्वक्त्रसंस्तुतेतुतेपरमेश्वरि
।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥२०॥
कृष्णेनण
ेनसंस्तुतेत
ुतेदेवि
शश्वद्भक्त्यासदाम्बिके
के।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥२१॥
हिमाचलसुतानाथसंस्तुतेतुतेपरमेश्वरि
।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥२२॥
इन्द्राणीपतिसद्भावपूजितेतेपरमेश्वरि
।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥२३॥
देवि
भक्तजनोद्दामदत्तानन्दोदयेऽम्बिकेके।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥२४॥
भार्यांंमनोरमांदेहि
मनोवृत्तानुसारिणीम्
णीम्।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥२५॥
तारिणि
दुर्गसंसारसागरस्याचलोद्भवेभवे।
रूपंदेहि
जयंदेहि
यशोदेहि
द्विषोषोजहि
॥२६॥
इदंस्तोत्रंपठित्वावातुमहास्तोत्रंपठेन्नरःनरः।
सप्तशतींतशतींसमाराध्यय
वरमाप्नोति
दुर्लभम्भम्॥२७॥
॥इति
श्रीमार्कण्डेयपुराणेण्डेयपुराणेअर्गलास्तोत्रंसमाप्तम्तम्॥
अर्गलास्तोत्रम्म्

About this stotram

A Stotram is a Sanskrit hymn of praise composed by great sages and poet-saints such as Adi Shankaracharya. Stotrams describe the deity’s form, qualities and deeds in richly poetic language, and chanting them is said to purify the intellect and awaken devotion. Many stotrams carry a phala-shruti — a closing verse describing the benefits of recitation.

How to chant

Stotrams reward slow, attentive chanting. Read the meaning once before you begin so the verses resonate as you recite. Early morning (Brahma Muhurat) is ideal, but any quiet time works. If Sanskrit feels difficult, chant along with the transliteration and let the rhythm settle naturally over a few days of practice.

daily-pujasanskritstotradevotional