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Devi Jas Songs in Hindi

Choose an opening line from the song index to find your place in this Hindi collection. The readings include Maiya Nav Durga Raksha Karo, Aarti Ki Biriya and Raja Janak Ke Dwar Mein. The song readings are in Devanagari; Roman words in the opening list are titles, not complete transliterations.

Text in देवनागरी script

Devotional text

Verse 1

(1)मैया नव दुर्गा रक्षा करो हो माँ (Maiya Raksha Karo Ho Maa )

Verse 2

(2)माई कृपा करो दुख भंजनी हो माँ ॥ (Mai Krupa Karo Dukh Bhanjani Ho Maa  )

Verse 3

(3)मोरी माई को ध्वजा लहरा रहो रे ॥ (Mori Mai ko Dhwaja Lahara Raho Re)

Verse 4

(4)तोहे मनाऊँ हो कालिका (Tohe Manau Ho Kalika)

Verse 5

(5)आरती की बिरिया होने लगी माँ (Aarti ki Biriya Hone Lagi Maa)

Verse 6

(6)अंगना में बजत बधाई हो मैया मेरी पण्डा दरश को आए ।।(Angana me Bajat Badhai Ho Maiya Meri)

Verse 7

(7)घुँघरू बांध लई माई ने, घुंगरू बांध लई रे,(Ghungharu Baandh Lai Maai Ne )

Verse 8

(7)ले पुजा हो देवी चंडिका हो माँ ॥(Le Puja Ho Devi Chandika Ho Ma)

Verse 9

(8)मैया बेगी सुमरु देवी, जालपा हो माँ ॥ (Maiya Beti Sumaru Devi, Jalpa Ho Ma)

Verse 10

(9)संकट हरण देवी शारदा हो माँ ॥ (Sankat Haran Devi Sharda Ho Ma)

Verse 11

(10)तेरे शरण हम आए सिंह वाहिनी हो माँ ॥(Tere Sharan Ham Aaye Singh Vahini Ho Ma)

Verse 12

(11)माई के द्वारे एक नीरिया रोवे, अंसुवन सीजे गुलजारी माया॥ (Mai ke Dware Ek Niriya Rowe)

Verse 13

(12)गंगा जमुना की बारी रेत में, दुर्गा ने कोट उठाई माया ॥(Ganga Jamuna ki Baari Ret Me)

Verse 14

(13)सिर पर हीरा सोहे री जगदम्बे भवानी (Sir Par Hira Sohe Ri Jagdambe Bhawani)

Verse 15

(14)भजो रे मन तुलसी सीता रामकहो (Bhajo Re Man Tulsi Sita Ram Kaho)

Verse 16

(15) राजा जनक के द्वार में हो माँ ॥(Raja Janak ke Dwar me ho Ma)

Verse 17

मैया नव दुर्गा रक्षा करो हो माँ

Verse 18

मैया नव दुर्गा रक्षा करो हो माँ

Verse 19

जग जननी जगतारण हो, नव रूप बनाय,

Verse 20

नवरात्रि में नव दीप रे, नित पूजो जाय ॥ मैया ॥

Verse 21

प्रथम पुत्री श्री शैल की रे, बनके सुख दीन्ह,

Verse 22

दूज की बन ब्रांहचारिणी रे, वन में तब कीन्ह ॥ मैया ॥

Verse 23

चन्द्र घंटा है तीसरी हो, मारो दैत्य को जाय ,

Verse 24

चौथे को माई कुष्मांडा रे, राक्षस खल राय ॥ मैया ॥

Verse 25

पांचवे मातु षडानन हो, विराजत कैलाश,

Verse 26

नित दर्शन सुर मुनि को रे, पुजयत सब आय,

Verse 27

छठ को माई कात्यायनी हो, शिव होत  कीन्ह ॥ मैया ॥

Verse 28

जाय विवाही शिव को रे, जग में जस लीन्ह

Verse 29

काल रात्रि सप्तमी को रे, वन प्रलय कीन्ह,

Verse 30

नाश कियो दुष्टन को रे, संतन सुख दीन्ह,

Verse 31

महागौरी जग जननी हो, धरो अष्टम रूप,

Verse 32

सकल कामना पायो रे, एक वैश्य एक भूप,

Verse 33

नवमी को सिद्धदात्री हो, काटो विपति महान ॥ मैया ॥

Verse 34

मनवांछित वर दीन्हा रे, कियो सिद्धि प्रधान,

Verse 35

प्रकृति रूप धारण करी हो, भावी सब संसार,

Verse 36

राम शंकर जप गाये रे, मैया तेरे दरबार ॥ मैया ॥

Verse 37

माई कृपा करो दुख भंजनी हो माँ

Verse 38

माई कृपा करो दुख भंजनी हो माँ

Verse 39

विकट रूप तुम धार के रे, आई रावण मार,

Verse 40

खप्पर देख भवानी, छाई गुस्सा अपार ॥ माई ॥

Verse 41

रक्तबीज एक दानव रे, ओहे डारे मार,

Verse 42

खून झेल खप्पर में, लियो सर लटकाय ॥ माई ॥

Verse 43

कलिकाल में बिचली रे, करू कौन उपाय,

Verse 44

ब्रम्हा विष्णु महेश, करे सोच विचार ॥ माई ॥

Verse 45

छोडके शिवजी आए रे, राह में लेट,

Verse 46

जोश में आई भवानी, धर दई सिने पे लात  ॥ माई ॥

Verse 47

जीभ निकाल भवानी रे, गई गुस्सा अपार,

Verse 48

जय जैकार करे सब, देवता रे रहे खुशी मनाए

Verse 49

शांत भई भवानी , मोहे चरणों की आस ॥ माई ॥

Verse 50

भक्त जनों की विनती, सीवचरण आधार,

Verse 51

शिव शंभू के चरणों में, जय बोलो हिंगलाज ॥ माई ॥

Verse 52

मोरी माई को ध्वजा लहरा रहो रे

Verse 53

मोरी माई को ध्वजा लहरा रहो रे

Verse 54

लंका को छलिया रावण सीता ले गओ चुराये,

Verse 55

जाएँ उतारे बाग में सीता, दे दओ छुवाए ॥ माई को ध्वजा ॥

Verse 56

रावण बोलो मंदोदरी से रे, सुनो रानी मेरी लाज,

Verse 57

एक नार हर लाई, भोजन करो तैयार ॥ मई को ध्वजा ॥

Verse 58

मंदोदर बोली रावण से सुनो स्वामी मेरी बात,

Verse 59

एक नार हर लाई हो, गओ लंका को नाश ॥ माई को ध्वजा ॥

Verse 60

थाली भर लड्डू लाई रे, चली मंदोदरी नार,

Verse 61

उठो सीता भोजन कर, करो लंका को राज ॥ माई को ध्वजा ॥

Verse 62

ऐसों भोजन हम न करिए रे, ऐसों हमें न सुहाय

Verse 63

क्या करे बास बिदिन में, जाय राम के पास ॥ माई को ध्वजा ॥

Verse 64

ऐसी सीता सतवंती रे, एक पुरुष की नार,

Verse 65

काहे को आई गढ़ लंका, कोहे  देती श्राप ॥ माई को ध्वजा ॥

Verse 66

रावण पिता लागत है रे, मंदोदर मोरी माय,

Verse 67

गढ़ लंका मेरो मायको, कोहे देती श्राप ॥ माई को ध्वजा ॥

Verse 68

लक्ष्मण देवर लगत है रे, वचन लियो मोरे लाये

Verse 69

तीन लोक एक पल में, रावण कौन बिसात ॥ माइ को ध्वजा ॥

Verse 70

तू मेरी आदि भवानी रे, रख लईयो मेरी लाज ,

Verse 71

पाँच भगत जस गाये, रख चरण आधार ॥ माई को ध्वजा ॥

Verse 72

तोहे मनाऊँ हो कालिका, रखो जान की रे लाज ॥

Verse 73

तोहे मनाऊँ हो कालिका, रखो जान की रे लाज ॥

Verse 74

प्रथम कालिका काली जी को, चरणन शीश नवाऊँ,

Verse 75

संकट में तोहे सुमरु माता

तोहे छोड़ कहाँ जाऊ ।

Verse 76

वो तो तेरो भरोसा, हाँ कालिका ….

Verse 77

तू है काली काली कालका, काल को निर्भय कर दे राम,

Verse 78

निर्भय होकर रहूँ सदा, मैं कभी न मुझको दर दे,

Verse 79

वो तो जगतारण है कालका ……

Verse 80

ब्रम्हा तेरी गोद में खेले, विष्णु दूध पिलाये,

Verse 81

शिवशंकर को तूनेमाता, ताण्डव नाच नचाए,

Verse 82

वो तो भक्ति मुक्ति की हाँ कालका …..

Verse 83

बड़े बड़े असुरोंकों मारे, मुण्ड की माला पहिने,

Verse 84

कोटिन तेरी भुजा है माता, कोटिन अस्त्र चलाये,

Verse 85

वो तो रक्त चरण की है कालका …….

Verse 86

बेगीराम मैया तेरे गुण को गाये,

Verse 87

चरवन शीश नवाय , वो तो तेरो करे सहाय कालका ……….

Verse 88

सुंदर मालन मेरी माँ, आरती की बिरिया होने लगी माँ ॥

Verse 89

सुंदर मालन मेरी माँ, आरती की बिरिया होने लगी माँ ॥

Verse 90

पहली आरति ये हो माँ कमलापति की माँ ,

Verse 91

जो जनम ड़ाए रे हमार ॥ आरती ॥

Verse 92

दूसरी आरती ये हो माँ सरस्वती की ओ माँ ,

Verse 93

जो ड़ाए है रे ज्ञान ॥ आरती ॥

Verse 94

तीसरी आरती रे ये वो शीतला माता की माँ,

Verse 95

जो मन बसी रे हमार ॥ आरती ॥

Verse 96

चौथी आरती रे ये वो माँ, चौसठ जोगिनी की रे,

Verse 97

खप्पर पर लाई हाथ ॥ आरती ॥

Verse 98

रही आरती रे ये वो माँ, सबरी मटा की ,

Verse 99

सब मिल घर रही ध्यान ॥ आरती ॥

Verse 100

सुमर सुमर माई तेरो रे आरती ,

Verse 101

रखियों चरण चितलाए ॥ आरती ॥

Verse 102

अंगना में बजत बधाई हो मैया मेरी पण्डा दरश को आए ।।

Verse 103

अंगना में बजत बधाई हो मैया मेरी पण्डा दरश को आए ।।

Verse 104

शिवशंकर मैया नेहत बुला लए, संग में गौरा मैया आ गई वो

Verse 105

॥ मैया मेरी ॥

Verse 106

राम लखन मैया नेहत बुला लए, संग में सीता मैया आ गई वो

Verse 107

॥ मैया मेरी ॥

Verse 108

ब्रम्हा विष्णु मैया नेहत बुला लए, संग में लक्ष्मी मैया आ गई वो

Verse 109

॥ मैया मेरी ॥

Verse 110

पाँच पांडव मैया नेहत बुला लए, संग में द्रोपदी आ गई वो

Verse 111

॥ मैया मेरी ॥

Verse 112

गंगा जमना मैया नेहत बुला लए, संग में सरस्वती आ गई वो

Verse 113

॥ मैया मेरी ॥

Verse 114

चंदा सूरज मैया नेहत बुला लए, संग में तारे भी आ गई वो

Verse 115

॥ मैया मेरी ॥

Verse 116

सुमर सुमर मैया तेरे जस गाये, चरण छोड़ कहाँ जाये वो

Verse 117

॥ मैया मेरी ॥

Verse 118

घुँघरू बांध लई माई ने, घुंगरू बांध लई रे,

Verse 119

घुँघरू बांध लई माई ने, घुंगरू बांध लई रे,

Verse 120

माई ने कर लई सोलह रे सिंगार ॥

Verse 121

माथे उनके बिंदिया सोहे, टिकली की झँकारी राम,

Verse 122

सिंदूर भर लई रे माई ने, सिंदूर भर लई रे ॥ घुंगरू बांध ॥

Verse 123

नाक में उनके नथनी सोहे, लटकन की झनकारी राम,

Verse 124

लोंग पहन लई रे माई ने, लोंग पहन लई रे ॥ घुंगरू बांध ॥

Verse 125

कानों में उनके झुमकी सोहे, कुंडल की झँकारी राम,

Verse 126

बाली पहन लई रे माई ने, बाली पहन लई रे ॥ घुँघरू बाँध ॥

Verse 127

गले में उनके हरवा सोहे, हीरे की झँकारी राम,

Verse 128

मोतीमन माला पहन लई रे, माला पहन लई रे ॥ घुँघरू बांध ॥

Verse 129

हाथ मे उनके चूड़ी सोहे, कंगन की झँकारी राम,

Verse 130

छल्ला पहन लई रे माई ने, छल्ला पहन लई रे ॥ घूँघरु बांध ॥

Verse 131

कमर में उनके करधन सोहे, गुच्छे की झनकारी राम,

Verse 132

केस बांध लई रे माई ने, केश बांध लई रे ॥ घुँघरू बांध ॥

Verse 133

पाँव में उनके पायल सोहे, बिछिया की झनकारी राम,

Verse 134

महावर लगा लई रे माई ने, महावर लगा लई रे ॥ घुँघरू बांध ॥

Verse 135

ले पुजा हो देवी चंडिका हो माँ

Verse 136

ले पुजा हो देवी चंडिका हो माँ ..

Verse 137

अहिरावण वन आयो, हर लई दोनों वीर रे,

Verse 138

राम लखन की जोड़ी, हर ले गयो पाताल ॥ ले पुजा ॥

Verse 139

नगर ढिंढोरा पीते, सुनो गाँव के लोग,

Verse 140

राम लखन दोनों को पूजे चंडी के पास ॥ ले पुजा ॥

Verse 141

राम लखन की जोड़ी, गई मढ़िया के पास,

Verse 142

मेवा और मिठाई, कर रहे पुजवान ॥ ले पुजा ॥

Verse 143

अरे अहिरावण एसो बोलो, सुनो बालक बात,

Verse 144

सुमरन हो तो सुमर लो, कौन करत सहाय ॥ ले पुजा ॥

Verse 145

रामचन्द्र ऐसे बोले, सुनो लक्ष्मण बात,

Verse 146

भारत शत्रुघन होते, वे ही करत सहाय ॥ ले पुजा ॥

Verse 147

भारत शत्रुघन सोहे, हनुमत बलवीर,

Verse 148

अंजनी पुत्र पवन सूत, वे ही करत सहाय ॥ ले पुजा ॥

Verse 149

रूप धरो चंडिका को, हनुमत बलवीर,

Verse 150

मेवा और मिठाई, सब आप ही खाये ॥ ले पुजा ॥

Verse 151

हनुमत एसो गरजो, जैसे गरजत काल,

Verse 152

मढ़िया गई रे शरण में, चंडी गई रे पताल ॥ ले पुजा ॥

Verse 153

सुमर सुमर जस गाये रे, मैया तेरे दरबार,

Verse 154

भकतन की लज्जा राखो, चरणन आस लगाए ॥ ले पुजा ॥

Verse 155

मैया बेगी सुमरु देवी, जालपा हो माँ

Verse 156

मैया बेगी सुमरु देवी, जालपा हो माँ ..

Verse 157

महिषासुर एक दानव रे, जग भयो परचण्ड ,

Verse 158

युद्ध करण सब जीते, धरती के नवखंड ॥ मैया बेगी ॥

Verse 159

ब्रम्हा विष्णु सदाशिव रे, माने सब हार,

Verse 160

जीत लियो इंद्रासन, बड़ो करत प्रहार ॥ मैया बेगी ॥

Verse 161

सकल देव उठ भागे रे, माई दुर्गा के पास,

Verse 162

त्राहि त्राहि कर आए, राक्षस को त्रास ॥ मैया बेगी ॥

Verse 163

तू मेरी आदि भवानी रे, देवी सुनहु पुकार,

Verse 164

महिषासुर को मारो, मैया करो उद्धार ॥ मैया बेगी ॥

Verse 165

क्रोध कारण उठ गरजी रे, कर धर हथियार,

Verse 166

लंगूरा ने सिंघला पलानो, देवी भई असवार ॥ मैया बेगी ॥

Verse 167

हंसा पे चढ़ ब्रम्हा आ गए रे, रथ गरुड गोपाल,

Verse 168

नंदी पे चढ़ भोला आ गए, संग भूत बेताल ॥ मैया बेगी ॥

Verse 169

कोन बरन माई दुर्गा रे, काहे पे असवार,

Verse 170

कोन बरन महिषासुर, काहे पे असवार ॥ मैया बेगी ॥

Verse 171

लाल बरन दुर्गा रे, सिंघला पे असवार,

Verse 172

कारो बरन महिषासुर , रण भैसा असवार ॥ मैया बेगी ॥

Verse 173

महिषासुर जब गरजो रे, धायो बलवीर,

Verse 174

सकाल देवता भागे, मन धरण न धीर ॥ मैया बेगी ॥

Verse 175

जब रण में कलकारी रे, जैसे गरजत काल ,

Verse 176

महिषासुर ने देखो, लोचन कर लाल ॥ मैया बेगी ॥

Verse 177

विष्णु चक्र घुमाए रे, क्रोध करे जगदीश,

Verse 178

दुर्गा ने खड्ग प्रहारी, काटी रिपु शीश ॥ मैया बेगी ॥

Verse 179

जय दूरगे जय दूरगे रे, गति आगम अपार,

Verse 180

जन की सोच निवारी, हरी धरती को भार ॥ मैया बेगी ॥

Verse 181

अस्तुति कर सुर आए रे, सब अपने धाम,

Verse 182

बेगीराम जस गाये, देवी दुर्गा के आम ॥ मैया बेगी ॥

Verse 183

संकट हरण देवी शारदा हो माँ

Verse 184

संकट हरण देवी शारदा हो माँ

Verse 185

ब्रम्हा पे संकट पड़ गओ रे, मैया हो गई रे सहाय ,

Verse 186

कुम्भकरण की मति फेरि, नींद मांगी छह मास ॥ संकट हरण ॥

Verse 187

देवान पे संकट पड़ गओ रे, शारदा हो गई सहाय ,

Verse 188

केकई की मति फेरि, राम गए वनवास ॥ संकट हरण ॥

Verse 189

हनुमत पे संकट पड़ गओ रे, मैया हो गई सहाय,

Verse 190

रावण की मति फेरि, ब्रम्ह्पाश से छुड़ाय ॥ संकट हरण ॥

Verse 191

आल्हा पे संकट पड़ गओ रे, शारदा हो गई सहाय,

Verse 192

बावनगढ को जीतो, आल्हा अमर कराय ॥ संकट हरण ॥

Verse 193

धानू पे संकट पड़ गओ रे, मैया हो गई सहाय,

Verse 194

दरश ड़ाए सेवक को, संग मे रहे छाय ॥ संकट हरण ॥

Verse 195

तेरे शरण हम आए सिंह वाहिनी हो माँ

Verse 196

तेरे शरण हम आए सिंह वाहिनी हो माँ

Verse 197

सकत देवता उठकर भागे रे गए ब्रम्हा के पास,

Verse 198

सब मिलकर पहुंचे विष्णु के पास ॥ तेरे शरण ॥

Verse 199

विष्णु लोक से चालत भए गए कैलाश,

Verse 200

हाथ जोड़ विनती करे, सुनो शंभू अविनाश ॥ तेरे शरण ॥

Verse 201

देवता गए हिमालय रे, देव विनय सुनाए,

Verse 202

देवी गौरा को, सब रहे मनाए ॥ तेरे शरण ॥

Verse 203

शुंभ निशुंभ दोनों दानव, वर पाये अपार ,

Verse 204

कठिन तपस्या किन्हों, ब्रम्हा से वर लिन्हो अपार ॥ तेरे शरण ॥

Verse 205

पार्वती मैया आई, गंगा कारण गई असनान ,

Verse 206

पुच राय देवी देवों से, करो कौन को ध्यान ॥  तेरे शरण ॥

Verse 207

देवता की वाणी सुन लाई रे, प्रगति कौशिकी माई,

Verse 208

पार्वती सा अंग प्रगटी कौशिकी नाम कहारी ॥ तेरे शरण ॥

Verse 209

हिमालय से प्रगटी मैया कालरात्रि कहाय,

Verse 210

शत्रु की नाश करो बोली दुर्गा माई ॥ तेरे शरण ॥

Verse 211

तेरे चरण बलहारी मैया, माई देवी के दरबार,

Verse 212

रामकिशन जस गाये मैया सुनलों पुकार ॥ तेरे शरण ॥

Verse 213

माई के द्वारे एक नीरिया रोवे

Verse 214

माई के द्वारे एक नीरिया रोवे

Verse 215

मंडिया मे से बोले जगतारण, का अंकट है तोय माया ।

Verse 216

कहा नाम है तेरी सुंदरी, कौन एसजी नार कहाय माया ,

Verse 217

पवन रेखा है नाम हमारों, उग्रसेन भरतार माया ।

Verse 218

घर के राजा बास क़हत है लगे कलेजे बोल माया ।

Verse 219

बांझ का नाम मिटाय जगतारण, या कारण मे आई माया ।

Verse 220

रथ पे बैठी संग सखिन के, बन मे घुमन जाय माया ।

Verse 221

दसमे महिना पुत्र हो गयो, वो हौए बलवान माया ।

Verse 222

वन मे घुमत पहुँच रानी, बंबूढ़ा एक अम्बा माया ।

Verse 223

बूढ़ा मे दैत्य हटो बाके, दिन की रैन बनाई माया ।

Verse 224

हाथ पकड़ रानी के ले गयोटेरी पुन हो माया ।

Verse 225

दसमे मास कंस पैदा भाए, असगुन ये है अनेक माया ।

Verse 226

आँधी बहुत ज़ोर से आई, गर्जन लागे मेट माया।

Verse 227

माघ सुदी तेरस को केएनएस भाए दिनसा बिसतरवार माया ।

Verse 228

पुत्र जन्म सुन उग्रसेन को, हिमरा लेक हिलोर माया ।

Verse 229

मंगलवार कराय नृपत मे, पंडित लाये है बुलाय माया ।

Verse 230

पंडित ने अनुमान लगायों, बालक अति बलवान माया ।

Verse 231

कंस नाम व को रख देओ, देगा दुख अनेक माया ।

Verse 232

पाँच भगत मई तेरे गुण कवि रामराव हर्षाय माया ॥

Verse 233

गंगा जमुना की बारी रेत में, दुर्गा ने कोट उठाई माया ॥

Verse 234

गंगा जमुना की बारी रेत में, दुर्गा ने कोट उठाई माया ॥

Verse 235

कोट उठाए मैया बुगुरा बनाए कलश परेरी आसमान माया ।

Verse 236

ता ऊपर चढ़ देखे जगतारण, दिशाग में चार देश माया ।

Verse 237

चार देश की चार ध्वजा री माई, धानू के ध्वजा नहीं आई माया।

Verse 238

का तेरो धनु माया मे भूलो री मई, का रतिया बिलसाय माया।

Verse 239

ना मेरो धनु माया में भूलो री आई, न नरिया में बिलसाय माया ।

Verse 240

अस्सी कोसला नदी सतलज, किसविधि उतरेंगे पार माया ।

Verse 241

बढ़ाई को एक बालक बुलाओ री माई, चन्दन पेड़ कटाओ माया।

Verse 242

नदी सतलज की नौका बनाड़े, मढ़ैया के लाल किवाड़ माया ।

Verse 243

कोण तेरी नौका में जगतारण, कौन हे खेवर हार माया ।

Verse 244

देवी शारदा नौका में बैठी वो मई, लंगूरे है खेवनहार माया ।

Verse 245

धर्मी धर्मी भार उतार गए, पानी रहे मझधार माया ।

Verse 246

सुमर सुमर मैया तेरे जस गाये, चरण छोड़ कहाँ जाए माया ।

Verse 247

सिर पर हीरा सोहे री जगदम्बे भवानी,

Verse 248

सिर पर हीरा सोहे री जगदम्बे भवानी,

Verse 249

कानों में झुमकी झूल रही हो माँ ॥

Verse 250

काहे को मैया तेरे मंदिर बनो है,

Verse 251

काहे के लगे दरवाजे री ,

Verse 252

सोने को मैया मंदिर बनो,

Verse 253

लाल लगे री दरवाजे भवानी ॥ जगदम्बे भवानी ॥

Verse 254

काहे को मैया तेरे बाग बगीचा,

Verse 255

काहे की फुलवारी री ,

Verse 256

नारियल को मैया तेरे बाग बगीचा,

Verse 257

चम्पाकली फुलवारी ॥ जगदम्बे भवानी ॥

Verse 258

पाप निवारण आई जगतारण,

Verse 259

नगरे चले अगवानी री

Verse 260

सुमर सुमर मैया तेरे जस गाउ,

Verse 261

चरण आस लगाए री ॥ जगदम्बे भवानी ॥

Verse 262

भजो रे मन तुलसी सीता रामकहो मेरी माँ ॥

Verse 263

भजो रे मन तुलसी सीता रामकहो मेरी माँ ॥

Verse 264

साँझ भई दिन गयो बुढन को, गौहान बेरमाई हो राम,

Verse 265

गौवा बछड़ा बांध के, तुलसी चले ससुराल गयो हो राम ।

Verse 266

आगम पंथ एक नधिया बहत है, मुर्दा बात बहो हे राम।

Verse 267

उस मुर्दा की बाह पकड़ , तुलसी पार गयो हो राम ।

Verse 268

आसपास सब घूम घूम के देखो दरवाजे तपा में राम ।

Verse 269

बीच भवन में साथ को वो ही, पदक तुलसी ऊपर जाहे हो मेरी माँ

Verse 270

तू तो तिरिया ज्ञान की पूरी, तूने ज्ञान दियो हो माँ ॥ भजो ॥

Verse 271

राजा जनक के द्वार में हो माँ

Verse 272

राजा जनक के द्वार में हो माँ

Verse 273

कौन शहर बसाये रे, कोने सिंगार,

Verse 274

कोने कलश रखायो, गंगा की धार ॥ राजा ॥

Verse 275

राजा शहर बसायों रे, रति का सिंगार,

Verse 276

देवी कलश रखायो रे, गंगा की धार ॥ राजा ॥

Verse 277

कोने ताल खुदाए रे, कोने अमृत बाग,

Verse 278

कोने भुवन बनाए, गिरजा करत विस्तार ॥ राजा ॥

Verse 279

विष्णु टार खुदाए रे, विधि अमृतबाग,

Verse 280

जनक ने भुवन बनाए, गिरजा करत विस्तार ॥ राजा ॥

Verse 281

इंद्रा वर्ण ने रच दियो रे, आर रति कर चंद,

Verse 282

रंग भुवन बनाए तारा गण रात ॥ राजा ।।

Verse 283

को ने फूल बनाए रे, नारियल अर लाख,

Verse 284

लॉन्ग लायची केवड़ा, केशव रंग कारज ॥ राजा ॥

Verse 285

दुर्गा फूल बनवाए रे, नारियल अर लाख,

Verse 286

लॉन्ग लायची केवड़ा, नारियल रंग लाख ॥ राजा ॥

Verse 287

पाँच भगत मिल जस गाये रे, चरनन चितलाय,

Verse 288

करी कृपा जगतारण, नित करो सहाए ॥ राजा ।।

Reading guide

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