गढकालिका आरती :
Gadhkalika Aarti :
Text in देवनागरी script
Devotional text
Gadhkalika Aarti : गढ़कालिका आरती (Gadhkalika Aarti) महाकाल की नगरी उज्जैन में स्थित प्रसिद्ध गढ़कालिका मंदिर में प्रतिदिन की जाती है। यह आरती माँ Gadhkalika की भक्ति और शक्ति का प्रतीक है, जिसे रोज़ शाम के समय भक्तगण बड़ी श्रद्धा से गाते हैं। गढ़कालिका आरती के दौरान पूरा मंदिर भक्तिमय हो उठता है और माँ कालिका की दिव्य महिमा का अनुभव होता है। भक्तजन Gadhkalika Aarti में भाग लेने के लिए दूर-दूर से आते हैं और इसे गाते हुए स्वयं को माँ की कृपा से धन्य मानते हैं। Gadhkalika Aarti के शब्द माँ कालिका की महिमा का वर्णन करते हैं और इस आरती के माध्यम से भक्तजन माँ से अपने जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की प्रार्थना करते हैं। Gadhkalika Aarti के समय मंदिर परिसर में चारों ओर धूप, दीप और पुष्प की खुशबू फैल जाती है, जिससे माहौल और भी पवित्र और भक्ति से भर जाता है। Gadhkalika Aarti का महत्व न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी है, क्योंकि यह भक्तों को एकजुट करती है और उनके मन को शांति और संतोष प्रदान करती है। इस प्रकार, गढ़कालिका आरती एक अनूठा आध्यात्मिक अनुभव है जो माँ कालिका की अद्वितीय महिमा को समर्पित है।
ॐ क्रां काल्यै नमः |ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं परिपूर्णेन्द्रिकायै नमः |ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं कालिकायै नमः |ॐ क्रीं क्रीं क्रीं परमेश्वरी कालिकायै नमः |ॐ नमः काल्यै नमः |ॐ नमः कालिकायै नमः |ॐ नमः महाकाल्यै नमः |ॐ नमः महाकालिकायै नमः |ॐ काल्यै नमः |ॐ महाकालिकायै नमः |
मैया करूं गढकाली तोरी आरती हो मां -2मैेया आरती मां बेल फूल चढाउं वो मोरी माय-2हल्दी कुंकू नारियल धूप दीप, कपूरल सजी थार -2आरती गढकाली की- हो मैया-आरती गढकाली कीगांव हरेक पवार -2 (मैया) करूं गढकाली तोरी आरती ….
ब्रम्हाण्ड की रखवारी तू, धारा नगर ठिकान -2राजा भोज ल पायो-2, तोल बुद्धि अन ज्ञान-2(मैया) करूं गढकाली …….
य धरती को कोना कोना मं, फैल्या जो पवार-2हमीं सब तोराच बेटा-2, देजो बुद्धि अन ज्ञान-2(मैया) करूं गढकाली …….
तेरो दरषन का प्यासा, बेटा मां, करखेत पुकार-2कर सबकी मनसा पुरी-2, धन्य होये सब पवार-2(मैया) करूं गढकाली …….
कुलदेवी माय तु हमारी, कर देजो मां उद्धार -2गेवरी गाउ मैया कमसे,-2, तोरी महिमा स अपार-2(मैया) करूं गढकाली …….
About this aarti — Durga
An Aarti is a song of worship sung while waving a lit lamp (diya) before the deity. The circling flame symbolises the removal of darkness and the offering of one’s ego at the feet of the divine. Aartis are sung at the end of puja in temples and homes across India, and their familiar melodies mark the rhythm of daily worship.
How to chant
Light a ghee or oil lamp on a small plate (thali), optionally with flowers, incense and akshata (rice grains). Sing the aarti while slowly circling the lamp clockwise before the deity. Afterwards, cup your hands over the flame, touch your eyes and forehead, and share prasad with everyone present.