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जब् सती ने जन्म लियो रि

Jab Sati Ne Janam Liyo Ri

Text in देवनागरी script

Devotional text

Verse 1

जब सती ने जन्म लियो री (Lyrics)कोरस:जब सती ने जन्म लियो री मां, वहां अपना रे नहीं कोई मां।जब सती ने जन्म लियो री मां, वहां अपना रे नहीं कोई मां।वहां अपना रे नहीं कोई मां, वहां अपना रे नहीं कोई मां।जब सती ने जन्म लियो री मां, वहां अपना रे नहीं कोई मां।

Verse 2

अंतरा 1:जन्म मई जल थल के भीतर, एक कमल को रे फूले मां।जन्म मई जल थल के भीतर, एक कमल को रे फूले मां।वो ही फूल के बीच जन्म ली मेरी मां, शक्ति ने लियो अवतार मां।वो ही फूल के बीच जन्म ली मेरी मां, शक्ति ने लियो अवतार मां।

Verse 3

जब सती ने जन्म लियो री मां, वहां अपना रे नहीं कोई मां।जब सती ने जन्म लियो री मां, वहां अपना रे नहीं कोई मां।

Verse 4

अंतरा 2:जब शक्ति ने हाथ मली हो मां, सीने फफोला उठे आए मां।जब शक्ति ने हाथ मली हो मां, सीने फफोला उठे आए मां।पहले फफोला के फूटत मेरी मां, ब्राह्मण लियो अवतार मां।पहले फफोला के फूटत मेरी मां, ब्राह्मण लियो अवतार मां।

Verse 5

ब्रह्मा को दे मई हंस सवारी, ब्रह्मलोक मां जाए विराजे।ब्रह्मा को दे मई हंस सवारी, ब्रह्मलोक मां जाए विराजे।

Verse 6

अंतरा 3:दूजे फफोला के फूटत मेरी मां, विष्णु ने लियो अवतार मां।दूजे फफोला के फूटत मेरी मां, विष्णु ने लियो अवतार मां।विष्णु को दे मई गरुड़ सवारी, क्षीर सागर में जाए विराजे।विष्णु को दे मई गरुड़ सवारी, क्षीर सागर में जाए विराजे।

Verse 7

अंतरा 4:तीजे फफोला के फूटत मेरी मां, शंभू ने लियो अवतार मां।तीजे फफोला के फूटत मेरी मां, शंभू ने लियो अवतार मां।शंभू को दे मई नंदी सवारी, शंभू को दे मई नंदी सवारी

शंभू गए कैलाश मां विराजे।

Verse 8

जब सती ने जन्म लियो री मां, वहां अपना रे नहीं कोई मां।जब सती ने जन्म लियो री मां, वहां अपना रे नहीं कोई मां।

Verse 9

यह एक पारंपरिक देवी जस गीत है, जो माता सती के जन्म और त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) की उत्पत्ति की पौराणिक कथा को अत्यंत सरल और भक्तिमय ढंग से प्रस्तुत करता है. गीत के अनुसार, माता शक्ति का प्राकट्य जल और थल के बीच खिले एक दिव्य कमल के पुष्प से हुआ था. कथा के एक रोचक अंश में बताया गया है कि देवी ने जब अपने हाथों को मला, तब उनके तेज से तीन फफोले (पुंज) उत्पन्न हुए, जिनसे क्रमशः ब्रह्मा, विष्णु और शंभू का अवतार हुआ. देवी ने ही उन्हें उनके वाहन (हंस, गरुड़ और नंदी) प्रदान किए और उन्हें उनके लोकों में प्रतिष्ठित किया.

Verse 10

आभार (Courtesy)गायक: संतोष सिंह ठाकुर

Verse 11

संगीत लेबल: जैन म्यूजिक (Jain Music)

Verse 12

मूल स्रोत: यूट्यूब – देवी जस जब सती ने

About this bhajan — Durga

Devotional recitation is one of the simplest and most powerful practices in the Hindu tradition. Regular chanting calms the mind, purifies the atmosphere of the home, and deepens one’s connection with the deity. These sacred compositions have been sung by devotees for generations and are suitable for daily practice, during morning or evening puja, or on special festival days.

How to chant

Sit comfortably facing your home altar or a clean, quiet space. Light a lamp or incense if you wish. Begin with a short prayer to Ganesha, then recite the text slowly and clearly, focusing on the meaning rather than speed. Consistency matters more than duration — even five minutes of daily chanting brings visible peace of mind.

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