Mai alkh jagaun tore dware pe
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माई अलख जगाऊं – देवी जस (Lyrics in Hindi)मुखड़ा (Chorus):माई अलख जगाऊं तोरे द्वारे पे हो माँ
ओ माँ अलख जगाऊं तोरे द्वारे पे हो माँ।माई अलख जगाऊं तोरे द्वारे पे हो माँ
ओ माँ अलख जगाऊं तोरे द्वारे पे हो माँ।
अंतरा 1:अरे रोम रोम को रे माता
आओ तुम्हें ही तपती
भाग्यविधाता।सारा जगत तोरे गूंजेगा
सारा जगत तोरे गूंजेगा।माई अलख जगाऊं तोरे द्वारे पे हो माँ
ओ माँ अलख जगाऊं तोरे द्वारे पे हो माँ।
अंतरा 2:करौली वाली माता
अमृत बरसे माता
ओ ज्वाला मैया तोरे द्वारे पे।दे देवी दर्शन करौली वाली
करौली वाली माई अलख जगाऊं तोरे द्वारे पे हो माँ।ओ माँ अलख जगाऊं तोरे द्वारे पे हो माँ।
अंतरा 3:भगत तोरे द्वार खड़े
भगत तोरे द्वार खड़े
देवी मैया चढ़ाऊं चोली
चढ़ाऊं चोली दादा साहेब।तोरे द्वार खड़ी मैया
तोरे द्वार खड़ी मैया
दे देवी दर्शन, माई अलख जगाऊं तोरे द्वारे पे हो माँ।ओ माँ अलख जगाऊं तोरे द्वारे पे हो माँ।
विवरण (Description)यह गीत माता के प्रति अनन्य भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है। ‘अलख जगाना’ का अर्थ है ईश्वर के नाम का आह्वान करना या जागृति फैलाना। इस जस गीत में भक्त माता करौली और ज्वाला देवी के द्वार पर खड़े होकर उनसे दर्शन की गुहार लगा रहा है। गीत में माता को ‘भाग्यविधाता’ कहा गया है, जिनके नाम की गूँज पूरे संसार में है। भक्त माता को चुनरी और चोली अर्पित करने की मन्नत मांगते हुए उनके प्रति अपना पूर्ण समर्पण व्यक्त करता है।
आभार (Courtesy)गायक: संतोष सिंह ठाकुर
संगीत लेबल: जैन म्यूजिक (Jain Music)
मूल स्रोत: यूट्यूब – माई अलख जगाऊं