दत्तात्रेय सुप्रभातम्
Dattatreya Suprabhatam
Dattatreya Suprabhatam
Text in देवनागरी script
Devotional text
श्रीभूतनाथीभूतनाथअथवाअय्यप्पस्वामिनःनःसुप्रभातम्भातम् श्रीभूतनाथीभूतनाथअथवाअय्यप्पस्वामिनःनःसुप्रभातम्भातम् श्रीगणेशायीगणेशायनमः। श्रीकण्ठपुत्रहरिनन्दन विश्वमूर्ते लोकैकनाथकरुणाकरणाकरचारुमूर्ते। श्रीकेशवात्मज सुमनोहरसत्यमूर्ते श्रीभूतनाथीभूतनाथभगवन्तवसुप्रभातम्भातम्॥१॥ श्रीविष्णुरुद्रसुतसुतमङ्गळ कोमलाङ्ग देवाधिदेव देवजगदीशसरोजनेत्र। कान्तारवासारवाससुरमानववृन्दसेव्य श्रीभूतनाथीभूतनाथभगवन्तवसुप्रभातम्भातम्॥२॥ आशानुरूपफलदायकपफलदायककान्तमूर्ते ईशानकेशवसुतमणिकण्ठ सुदिव्यमूर्ते। भक्तेशेशभक्तहृदयस्थितभूमिपालपाल श्रीभूतनाथीभूतनाथभगवन्तवसुप्रभातम्भातम्॥३॥ सत्यस्वरूपसकलेशगुणार्णवेशवेश मर्त्यस्वरूपवरदेशरमेशसूनो। मुक्तिप्रदत्रिदशराजदशराजमुकुन्दसूनो सूनो श्रीभूतनाथीभूतनाथभगवन्तवसुप्रभातम्भातम्॥४॥ कालारिपुत्र महिषीमदनाशनषीमदनाशनश्री कैलासवासशबरीश्वररधन्यमूर्ते। नीलाम्बराभरणशोभितसुन्दराङ्ग श्रीभूतनाथीभूतनाथभगवन्तवसुप्रभातम्भातम्॥५॥ नारायणात्मज जपरात्पर रदिव्यरूप वाराणसीशशिवनन्दन नकाव्यरूप। गौरीशपुत्रपुरुषोत्तम बालरूपप श्रीभूतनाथीभूतनाथअथवाअय्यप्पस्वामिनःनःसुप्रभातम्भातम् श्रीभूतनाथीभूतनाथ, भगवान्तवसुप्रभातम्भातम्॥६॥ त्रैलोक्यनाथनाथगिरिवासवासवनेनिवासवास भूलोकवासभुवनाधिपदास पदासदेव। वेलायुधप्रियसहोदरयसहोदरशम्भुसूनोुसूनो श्रीभूतनाथीभूतनाथभगवन्तवसुप्रभातम्भातम्॥७॥ आनन्दरूपकरधारितचापबाणतचापबाण ज्ञानस्वरूप, गुरुनाथनाथ, जगन्निवासवास। ज्ञानप्रदायकदायकजनार्दननन्दनेशनेश श्रीभूतनाथीभूतनाथभगवन्तवसुप्रभातम्भातम्॥८॥ अम्भोजनाथसुतोजनाथसुतसुन्दरधन्यमूर्ते शम्भुप्रियाकलितपुण्य पुराणमूर्ते। इन्द्रादिदेवगणवन्दित ब्रह्मचारिन्न् श्रीभूतनाथीभूतनाथभगवन्तवसुप्रभातम्भातम्॥९॥ देवेशदेवगुणपूरिततभाग्यमूर्ते श्रीवासुदेवसुतीवासुदेवसुतपावनभक्तबन्धो। सर्वेश सर्वमनुजार्चिततदिव्यमूर्ते श्रीभूतनाथीभूतनाथभगवन्तवसुप्रभातम्भातम्॥१०॥ नारायणात्मज जसुरेशनरेशभक्त- लोकेशकेशवशिवात्मज जभूतनाथ। श्रीनारदादिमुनिपुङ्गवपूजितेशतेश श्रीभूतनाथीभूतनाथभगवन्तवसुप्रभातम्भातम्॥११॥ आनन्दरूपसुरसुन्दरदेहधारिन् न् शर्वात्मज शबरीशसुरालयेश।सुगरीश नित्यात्मसौख्यवरदायकवरदायकदेवदेव श्रीभूतनाथीभूतनाथभगवन्तवसुप्रभातम्भातम्॥१२॥ सर्वेश सर्वमनुजार्जितसर्वपापाप- संहारकारकचिदात्मक रुद्रसूनोसूनो। सर्वेश सर्वगुणपूर्णकृपाम्बुराशेुराशे श्रीभूतनाथीभूतनाथभगवन्, तवसुप्रभातम्भातम्॥१३॥ श्रीभूतनाथीभूतनाथअथवाअय्यप्पस्वामिनःनःसुप्रभातम्भातम् ओङ्काररूपजगदीश्वररभक्तबन्धो पङ्केरुहाक्षपुरुषोत्तम कर्मसाक्षिन्न्। माङ्गल्यरूपमणिकण्ठ मनोभिराम राम श्रीभूतनाथीभूतनाथभगवन्तवसुप्रभातम्भातम्॥१४॥ इति श्रीभूतनाथीभूतनाथअथवाअय्यप्पस्वामिनःनःसुप्रभातम्भातम्।
About this suprabhatam — Dattatreya
Devotional recitation is one of the simplest and most powerful practices in the Hindu tradition. Regular chanting calms the mind, purifies the atmosphere of the home, and deepens one’s connection with the deity. These sacred compositions have been sung by devotees for generations and are suitable for daily practice, during morning or evening puja, or on special festival days.
How to chant
Sit comfortably facing your home altar or a clean, quiet space. Light a lamp or incense if you wish. Begin with a short prayer to Ganesha, then recite the text slowly and clearly, focusing on the meaning rather than speed. Consistency matters more than duration — even five minutes of daily chanting brings visible peace of mind.