ଗାଯତ୍ରୀ କଵଚମ୍ ଅଲଭ୍ଯ
Gayatri Kavacham Alabhya
Gayatri Kavacham Alabhya
Text in देवनागरी script
Devotional text
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अलय ीगायीकवच
{॥ अलय ीगायीकवच ॥}
िविनयोगः
ॐ अय ीगायीकवचय ािवणुाः ऋषयः ।
ऋयजुःसामाथविण छदांिस । परविपणी गायी देवता ।
भूः बीज । भुवः शतः । वः कीलक । सुवः कीलक ।
चतुवशयरा ीगायीीयथ जपे िविनयोगः ।
यानं
वाभां कुडकां हतां, शुिनमलयोितषी ।
सवतवमय वदे, गाय वेदमातर ॥
मुतािवुमहेमनीलधवलैछायैः मुखेीणैः ।
युतािमदुिनबरनमुकुटां तवाथवणमका ॥
गाय वरदाभयाकुशकशां शूलं कपालं गुणैः ।
शखं चमथारिवदयुगलं हतैवहत भजे ॥
कवच पाठः
ॐ ॐ ॐ ॐ भूः ॐ ॐ भुवः ॐ ॐ वः ॐ ॐ त ॐ ॐ स ॐ
ॐ िव ॐ ॐ तु ॐ ॐ व ॐ ॐ रे ॐ ॐ यं ॐ ॐ भ ॐ ॐ ग ॐ
ॐ दे ॐ ॐ व ॐ ॐ य ॐ ॐ धी ॐ ॐ म ॐ ॐ िह ॐ ॐ िध ॐ
ॐ यो ॐ ॐ यो ॐ ॐ नः ॐ ॐ ॐ ॐ चो ॐ ॐ द ॐ
ॐ या ॐ ॐ ॐ ॐ ।
ॐ ॐ ॐ ॐ भूः ॐ पातु मे मूलं चतुदलसमिवत ।
ॐ भुवः ॐ पातु मे िलगं सजलं षदलामक ।
ॐ वः ॐ पातु मे कठं साकाशं दलषोडश । सुवः
ॐ त ॐ पातु मे पं ाणं कारणं पर ।
ॐ स ॐ रसं पातु मे सदा मम ।
ॐ िव ॐ पातु मे गधं सदा िशिशरसंयुत ।
ॐ तु ॐ पातु मे पश शरीरय कारणं पर ।
ॐ व ॐ पातु मे शदं शदिवहकारण ।
ॐ रे ॐ पातु मे िनयं सदा तवशरीरक ।
ॐ यं ॐ पातु मे अं सवतवैककारण ।
ॐ भ ॐ पातु मे ों शदवणैककारण ।
ॐ ग ॐ पातु मे ाणं गधोपादानकारण ।
ॐ दे ॐ पातु मे चायं सभायां शदिपणी ।
ॐ व ॐ पातु मे बाहुयुगलं च कमकारण ।
ॐ य ॐ पातु मे िलगं षदलयुत ।
ॐ धी ॐ पातु मे िनयं कृित शदकारण ।
ॐ म ॐ पातु मे िनयं नमो विपणी ।
ॐ िह ॐ पातु मे बु परमयं सदा ।
ॐ िध ॐ पातु मे िनयमहकारं यथा तथा ।
ॐ यो ॐ पातु मे िनयं जलं सव सवदा ।
ॐ यो ॐ पातु मे िनयं जलं सव सवदा ।
ॐ नः ॐ पातु मे िनयं तेजःपुजो यथा तथा ।
ॐ ॐ पातु मे िनयमिनलं कायकारण ।
ॐ चो ॐ पातु मे िनयमाकाशं िशवसिनभ ।
ॐ द ॐ पातु मे िजवां जपयय कारण ।
ॐ या ॐ पातु मे िनयं िशवं ानमयं सदा ।
ॐ तवािन पातु मे िनयं, गायी परदैवत ।
कृणं मे सततं पातु, ािण भूभुवः वरो ॥
ॐ भूभुवः वः तसिवतुवरेयं भग देवय धीमिह
िधयो यो नः चोदया ।
ॐ जातवेदसे सुनवाम सोममाराती यतो िनदहाित वेदाः ।
स नः पषदित दुगिण िववा नावेवं िसधुं दुिरतायनः ।
ॐ यबकं यजामहे सुगध पुटवधन ।
ऊविरकिमव बधना मृयोमुीय मामृता ॥
ॐ नमते तुरीयाय सशताय पदाय परो रजसेऽसावद मा ापत ॥
कवचसिहता चतुपादगायी सपूण ॥About this kavacham — Gayatri
Devotional recitation is one of the simplest and most powerful practices in the Hindu tradition. Regular chanting calms the mind, purifies the atmosphere of the home, and deepens one’s connection with the deity. These sacred compositions have been sung by devotees for generations and are suitable for daily practice, during morning or evening puja, or on special festival days.
How to chant
Sit comfortably facing your home altar or a clean, quiet space. Light a lamp or incense if you wish. Begin with a short prayer to Ganesha, then recite the text slowly and clearly, focusing on the meaning rather than speed. Consistency matters more than duration — even five minutes of daily chanting brings visible peace of mind.